Saturday 20th of July 2024 02:52:36 AM

विविध कला विधाएँ


क्रं-

कार्यक्रमों के नाम

विवरण



गुरू पूर्णिमा संगीत समारोह नाना साहब पानसे-बकायन, जिला-दमोह

ख्यात मृदंगाचार्य नाना साहब पानसे की स्मृति में प्रतिवर्ष गुरूपूर्णिमा के अवसर पर बकायन, जिला-दमोह समारोह का आयोजन किया जाता है।



 पं. नन्दकिशोर शर्मा स्मृति समारोह-भोपाल

भोपाल में हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की परम्परा को कायम रखने में प्रसिद्ध संगीतज्ञ पण्डित नन्द किशोर शर्मा जी का स्थान अग्रणीय है। आपने पुरान शहर भोपाल में सरस्वती कला मंदिर की स्थापना की जिसमें प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त कर संगीत के क्षेत्र में भोपाल का गौरव बढ़ाया। आप हारमोनियम एवं जलतंरग वादक के साथ-साथ नवीन वाद्य शीर्ष तरंग के आविष्कारक भी थे।



मध्यप्रदेश नाट्य समारोह

प्रदेश के रंगकर्म पर केन्द्रित समारोह यह प्रतिवर्ष मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में क्रमशः किया जाता है।



घुँघरू

युवा एवं प्रतिभाशाली कलाकारों को मंच प्रदान करने के उद्देश्य यह कार्यक्रम संयोजित किया जाता है।



संगीत-नृत्य-नाट्य-ललित कलाएँ के क्षेत्र में कार्यशालाएँ

नृत्य प्रशिक्षण कार्यशाला- हिन्दुस्तानी शास्त्रीय नृत्य की विभिन्न शैलियों के युवा कलाकारों की सहभागिता इस समारोह में होती है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान इच्छुक विद्यार्थियों में नृत्य के प्रति रूचि जागृत करने के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।



 संगीत प्रशिक्षण कार्यशाला

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की अत्यंत प्राचीन एवं दुलर्भ गायन शैली को प्रोत्साहित एवं संरक्षित करने के उद्देश्य से ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान इच्छुक विद्यार्थियों को संगीत के प्रति रूचि जागृत करने के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।



नाट्य एवं ललित कलाएँ

 मूर्तिकार शिविर- शिल्प कला के प्रति रूचि जागृत करने के उद्देश्य से शिविर का आयोजन।



नाट्य समारोह

रंगकर्म को प्रोत्साहन, संवर्धन एवं संरक्षण देने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है।



मध्य प्रदेश राज्य कला पुरस्कार प्रदर्शनी

मध्य प्रदेश के ललित कलाओं के 10 विख्यात कलाकारों के नाम पर केन्द्रित अकादमी ने वर्ष-2013 से  रूपंकर कलाओं के 10 पुरस्कारों की घोषणा की है और प्रतिवर्ष ललित कलाओं के 10 पुरस्कार प्रदान करती है। प्रत्येक पुरस्कार की राशि रुपये 51,000/- है। यह पुरस्कार खजुराहो नृत्य समारोह के अवसर पर प्रदान किये जाते है।



दुर्लभ वाद्य प्रसंग - लतीफ खाँ स्मृति समारोह-भोपाल

प्रदेश के ख्यात सारंगी नवाज उस्ताद अब्दुल लतीफ खाँ की स्मृति में दुर्लभ वाद्यों पर केन्द्रित समारोह का आयोजन भोपाल में किया जाता है। इसी अवसर पर दुर्लभ वाद्य के किसी एक साधक को उस्ताद लतीफ खाँ सम्मान से सम्मानित किया जाता है। वर्ष 2012 से उस्ताद लतीफ खाँ स्मृति में आयोजित सारंगी समारोह के स्वरूप में परिवर्तन कर इसे हिन्दुस्तानी शास्त्रीय दुर्लभ वाद्यों पर केन्द्रित देश के एकमात्र समारोह के रूप में स्थापित किया गया है।



कुमार गंधर्व समारोह-देवास

 मूर्धन्य संगीतकार पण्डित कुमार गन्धर्व की स्मृति में अकादमी द्वारा वर्ष 1992-93 से देवास में प्रतिवर्ष कुमार गन्धर्व समारोह का आयोजन किया जाता है। इस समारोह में देश के प्रसिद्ध एवं युवा प्रतिभाशाली कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त अकादमी के इस आयोजन को कुछ वर्षों पहले पण्डित कुमार गन्धर्व के 75वें जन्म वर्ष के दौरान वर्ष भर कड़ी के रूप में विभिन्न शहरों में आयोजित किया गया जिसे अच्छी सफलता प्राप्त हुई। समारोह के अवसर पर शासन द्वारा स्थापित कुमार गन्धर्व सम्मान से किसी एक युवा कलाकार को सम्मानित भी किया जाता है।



 माण्डू उत्सव-धार

 पर्यटन केन्द्र में शास्त्रीय एवं लोक परम्परा के आयोजन के क्रम में अकादमी द्वारा मालवा क्षेत्र में आयोजित किया जाने वाला यह एक अत्यंत प्रतिष्ठित एवं वृहद् स्तर का तीन दिवसीय समारोह है। माण्डू, पर्यटन स्थल होने की वजह से कला जगत में इस समारोह की लोकप्रियता बनी हुई है। अब तक अनेक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन इस समारोह के माध्यम से कर चुके हैं।



तानसेन संगीत समारोह-ग्वालियर

संगीत सम्राट तानसेन की स्मृति को चिरस्थायी बनाये रखने के उद्देश्य से आयोजित यह देश का एक वृहद संगीत समारोह है जिसे राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त है। इस छह दिवसीय समारोह में देश के वरिष्ठ एवं प्रतिभाशाली युवा कलाकार अपनी कला के माध्यम से संगीत सम्राट तानेसन को अपनी श्रृद्धांजलि अर्पित कर स्वयं को धन्य समझते हैं, अब तक इस समारोह में देश के अनेक शीर्षस्थ गायकों ने शिरकत की है। तानसेन समारोह को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप देते हुए संगीत सभाओं के अलावा अन्य प्रमुख गतिविधियाँ भी समारोह के साथ जोड़ी गई हैं जिसमें गमक, विश्व संगीत, वादी-संवादी, प्रदर्शनियाँ एवं गुजरी संगीत सभा शामिल है।



राग अमीर समारोह-इन्दौर

वरिष्ठ संगीतकार उस्ताद अमीर खाँ की स्मृति में अकादमी द्वारा विगत 26 वर्षों से इन्दौर में प्रतिवर्ष राग अमीर समारोह का आयोजन किया जाता है] जिसमें देश के वरिष्ठ एवं युवा कलाकार उस्ताद अमीर खाँ को अपनी संगीतांजलि अर्पित करते है। इन्दौर में आयोजित किया जाने वाला यह राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त है, जिसमें अब तक अनेक वरिष्ठ एवं युवा कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके है। संगीत सभाओं के अलावा ललित कलाओं पर केन्द्रित प्रदर्शनी ‘रंग अमीर’ ‘कला विमर्श’ एवं ‘रागदारी’ संगीत व्याख्यानमाला का आयोजन किया जाता है।



 सुरयात्रा-भोपाल

विगत कुछ वर्षों से आयोजित इस समारोह को सुगम संगीत (फिल्मी गीतों पर आधारित) के कार्यक्रमों के शीर्ष कार्यक्रम के रूप में देखा जाता है। हिन्दी फिल्मों के सदाबहार गीतों पर केन्द्रित कार्यक्रम।



 अलाउद्दीन संगीत समारोह-मैहर

 विख्यात संगीत मनीषी पद्मविभूषण स्वर्गीय बाबा अलाउद्दीन खाँ की स्मृति को अक्षुण्ण बनाये रखने के उद्देश्य से मैहर, जिला-सतना में अकादमी द्वारा वर्ष 1979-80 से प्रतिवर्ष इस समारोह का आयोजन किया जाता है जिसमें हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत-नृत्य के वरिष्ठ एवं युवा कलाकार अपनी कला के माध्यम बाबा को अपनी संगीतांजलि अर्पित करते हैं। यह समारोह राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त समारोह है। इस तीन दिवसीय समारोह को विस्तृत स्वरूप देते हुए डोम पंडाल स्थापित कर संगीत सभाओं के साथ भारतीय लघुचित्र शैलियों में राग-रागिनियों पर एकाग्र चित्रों की प्रदर्शनी ‘राग माला’ तथा उस्ताद की सांगीतिक दुनिया ‘आलमनामा’ को भी संयोजित किया जाता है।



खजुराहो नृत्य समारोह-खजुराहो

अकादमी द्वारा आयोजित किया जाने वाला अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त समारोह है। इस सात दिवसीय समारोह में देश के शीर्षस्थ और युवा प्रतिभाशाली नृत्यांगनाएँ एवं नर्तक अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। यह समारोह मध्यप्रदेश नहीं अपितु देश-विदेश के कला जगत में अत्यंत लोकप्रिय समारोह है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विभिन्न शैलियों का यह प्रतिष्ठित समारोह है। समारोह की उत्सवधर्मिता की स्थायी पहचान के लिए भारतीय शास्त्रीय नृत्य रूपों की मुख्य प्रस्तुतियाँ आयोजित होती है। साथ ही अनुषांगिक गतिविधि नेपथ्य-शास्त्रीय नृत्य शैली की कलायात्रा, कलावार्ता-कलाकार और कलाविदों का संवाद, हुनर-देशज कला परम्परा का मेला, आर्ट-मार्ट- ललित कलाओं का अंतर्राष्ट्रीय मेला, अलंकरण-मध्यप्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार एवं प्रदर्शनी में वृद्धि करते हुए कला परम्परा और कलाकारों पर केन्द्रित फिल्मों के प्रदर्शन की नयी गतिविधि अंतर्राष्ट्रीय फिल्म प्रभाग ’चल-चित्र’ कला परम्परा और कलाकारों पर केन्द्रित फिल्मों का उपक्रम शीर्षक से नवाचार के तहत विशेष रूप से आरम्भ की गई।



बैजू बावरा संगीत समारोह

महान संगीतज्ञ बैजू बावरा की स्मृति में इस वर्ष तीन दिवसीय कार्यक्रम चंदेरी जिला अशोक नगर में आयोजित किया गया है। कार्यक्रम प्रतिवर्ष आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।



धु्रपद केन्द्र-भोपाल
वर्तमान में गुरू-
अफजल हुसैन

उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादेमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, भोपाल के अन्तर्गत कार्यरत ध्रुपद केन्द्र की स्थापना 1 दिसम्बर 1981 को भोपाल में की गई थी। यह केन्द्र भारतीय शास्त्रीय गायन की दुर्लभ शैली ध्रुपद को गुरू-शिष्य परम्परा के अंतर्गत गहन प्रशिक्षण प्रदान करने का केन्द्र है। इस केन्द्र में डागर घराने के प्रख्यात ध्रुपद गायक एवं गुरू उस्ताद ज़िया फरीदुद्दीन डागर गुरू के पद पर दीर्घकाल तक आसीन रहे तत्पश्चात केन्द्र को समय-समय पर विख्यात रूद्रवीणा वादक उस्ताद ज़िया मोहिउद्दीन डागर का भी मार्गदर्शन एवं सानिद्ध प्राप्त होता रहा। इस केन्द्र में गुरू-शिष्य परम्परा के अन्तर्गत छात्रवृत्ति पर विद्यार्थियों को ध्रुपद का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।



चक्रधर नृत्य केन्द्र-भोपाल
वर्तमान में गुरू-
अल्पना वाजपेयी

चक्रधर कथक नृत्य केन्द्र की स्थापना के पीछे शिक्षा के औपनिवेशिक दृष्टि को दुरूस्त कर पारम्परिक भारतीय शिक्षा को पुनः स्थापित करना रहा है। यह शिक्षा गुरू केन्द्रित हुआ करती हैं और इसका उद्देश्य ऐसे नृत्य और संगीत कलाकार (नर्तक या नर्तकी) तैयार करना होता है जो अपने प्रदर्शनों में पारम्परिक अन्तदृर्ष्टि और नवाचार को निरन्तर प्रकट कर सके। यह प्रयोग गुरु-शिष्य सम्बन्धों के पारम्परिक दृष्टि को ध्यान में रखकर बनाया गया था। इन केन्द्रों की स्थापना का प्रयोग एक तरह की परम्परा की सफल पुनर्स्थापना ही सिद्ध हुई क्योंकि इसमें प्रशिक्षित अनेक छात्र आज देश के महत्वपूर्ण नर्तक/नृत्यांगनाएँ हैं। विगत लगभग तीन दशकों से गुरु-शिष्य परम्परा के अंतर्गत पारम्परिक रूप से कला विधाओं का प्रशिक्षण निरन्तर जारी है। आज नई पीढ़ी में कलाओं के विभिन्न अनुशासनों के प्रति गहरा रुझान देखने में आ रहा है। रायगढ़ घराने के महान नृतक महाराज चक्रधर सिंह की स्मृति में कथक नृत्य शैली की शिक्षा लगभग चार दशकों से अकादमी द्वारा गुरू-शिष्य परम्परा के अन्तर्गत प्रदान की जा रही है। चक्रधर नृत्य केन्द्र से अनेक छात्राओं ने कथक नृत्य में उच्च प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्तमान में सुश्री अल्पना वाजपेयी गुरू के पद पर आसीन है।



कलावार्ता

 रचनात्मक सृजनकर्म पर केन्द्रित अनियतकालीन पत्रिका का प्रकाशन।



तानसेन कलावीथिका

उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी की अनुसंग कार्यालय पड़ाव ग्वालियर में नियमित संचालित है।